हनुमान चालीसा:एक आध्यात्मिक चमत्कार
भूमिका
हनुमान चालीसा हिंदू धर्म के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक है। इसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा था, और यह भगवान हनुमान की भक्ति में डूबी हुई एक अनुपम काव्य रचना है। ऐसा माना जाता है कि इसका पाठ करने से भय, कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।
हनुमान जी का सुंदर चित्र

यह भगवान हनुमान जी का एक सुंदर चित्र है, जिसमें वे ध्यान मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। उनका दिव्य प्रकाश भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करता है। हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करें!
हनुमान चालीसा का महत्व
हनुमान चालीसा केवल एक भजन नहीं बल्कि एक शक्तिशाली मंत्र भी है। इसे पढ़ने से जीवन में कई प्रकार के लाभ मिलते हैं:
✅ मन की शांति: हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शांति और धैर्य मिलता है।
✅ भय से मुक्ति: यह स्तोत्र नकारात्मक ऊर्जा और डर को दूर करता है।
✅ शत्रुओं पर विजय: शत्रुओं से बचाव और सफलता के लिए इसका पाठ किया जाता है।
✅ स्वास्थ्य लाभ: इसे पढ़ने से कई प्रकार की मानसिक और शारीरिक समस्याओं से राहत मिलती है।
श्री हनुमान चालीसा
दोहा:
श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चार॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल-बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार॥
चौपाई:
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन विराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥
हाथ बज्र औ ध्वजा विराजे।
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥
शंकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन॥
विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे॥
लाय सजीवन लखन जियाए।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद शारद सहित अहीसा॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना॥
युग सहस्र योजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
सब सुख लहै तुम्हारी शरणा।
तुम रक्षक काहू को डरना॥
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै॥
भूत-पिशाच निकट नहिं आवै।
महावीर जब नाम सुनावै॥
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा॥
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै॥
चारों युग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै॥
अंतकाल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरु देव की नाईं॥
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
दोहा:
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
चालीसा का पाठ करने का सही तरीका
✔️ प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
✔️ हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर ध्यान करें।
✔️ चालीसा को श्रद्धा और विश्वास के साथ पढ़ें।
✔️ अंत में हनुमान जी की आरती करें और प्रसाद बांटें।
✔️ मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना विशेष लाभकारी होता है।
✔️ संकटमोचन हनुमानाष्टक के साथ इसका पाठ करने से और अधिक फल मिलता है।
निष्कर्ष
हनुमान चालीसा केवल एक धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से जीवन में सकारात्मकता और सफलता प्राप्त होती है।